परेशान किसान बोरिया बिस्तर लेकर पंहुचा मंडी
सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले मे किसानों का हाल इन दिनों बेहाल है अपनी ही धान बेचने के लिए उन्हें कहा कहा भटकना नहीं पड़ रहा किसान दर दर भटक रहा धान बेचने को और सबसे बड़ी बात किसान की कोई गलती नहीं गलती और चूक करें प्रशासनिक टीम और उसका खामियाजा किसान को झेलना पड़े ये बहुत दुर्भाग्य की बात है हम बात कर रहे पोरथ के किसान ललित प्रधान का जहाँ उन्हें कहा गया की पहले आपके घर जाकर धान का भौतिक सत्यापन किया जायेगा उसके बाद ही टोकन कटेगा,और 20 तारिक को नोडल अधिकारी वीरेंद्र सिंह राजपूत ने अपने साहियोगीयों के माध्यम से भौतिक सत्यापन कराया जिसमे 47 क़्विंटल धान पाया गया और उसी दिन किसान को समिति भेजकर टोकन कटाने को कहा फिर किसान ने टोकन कटा लिया और कहा 22 तारिक को धान लाना है आवक था किसान 22 तारिक को धान समिति लेकर पहुंच गया और वही भौतिक सत्यापन करने वाली एक टीम पटवारी सुनील ओगरे पोरथ किसान के घर पहुँचता है और धान नहीं है कहके उनका घर मे खाने के लिए रखे धान 20 बोरी को उपलब्ध दिखाकर बाकी धान रिजेक्ट कर देता है जबकि उसी दिन किसान का आवक था किसान मंडी धान लेकर पहुंच चूका था और बिना किसान के मौजूदगी मे भौतिक सत्यापन कर रिजेक्ट कर देता है पटवारी और नोडल की गलती से किसान आज दर दर भटक रहा 22 तारिक से किसान समिति, पटवारी, नोडल और sdm दफ़्तर तक चक्कर काट चूका लेकिन अब तक नहीं कटा,, परेशान किसान ने अकेला रहता है इस वजह से किसान अपना बोरा बिस्तर लेकर अब लुकापारा उपार्जन केंद्र मे डेरा डाल दिया है
सावल यह उठता है की प्रशासनिक टीम पटवारी और नोडल की गलती किसान क्यों भुगते,, आखिर पहले नोडल वीरेंद्र राजपुत भौतिक सत्यापन कराकर उसे दोबारा कैसे सत्यापन कराने भेजा गया,,, कही किसान को जानबूझकर परेशान तो नहीं किया जा रहा,, किसान का धान ना खरीदना पड़े क्या क्या तरकीब लगाया जा रहा यह किसानों के लिए बहुत दुर्भाग्य है अब देखना होगा ऐसे लापरवाही करने वाले नोडल और पटवारी पर क्या कार्यवाही की जाती है ये देखने वाली बात है
किसान का अलग से बाइट है हिंदी बोलने मे थोड़ी परेशनि है ओड़िसा बॉर्डर है इसलिए बाइट अलग से लिया गया है
नोडल मीडिया को देख चुपके से समिति से भाग गए और फोन ही नहीं उठा रहे
तहसीलदार सरिया फिल्ड मे गए है दूरभाष से सम्पर्क किया गया फोन नहीं उठाये

