



साइबर जागृति अभियान का चौथा चरण जारी, 128 से अधिक स्थानों पर लगाए गए जागरूकता शिविर
सारंगढ़-बिलाईगढ़, 8 सितंबर 2026। जिले में आम नागरिकों और विद्यार्थियों को बढ़ते साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ‘साइबर जागृति अभियान’ लगातार जारी है। छत्तीसगढ़ पुलिस के निर्देशन में चल रहे अभियान के चौथे चरण में ‘स्मार्टफोन प्राइवेसी और सुरक्षित ब्राउज़िंग’ को प्रमुख थीम बनाया गया है।
इसी क्रम में मंगलवार को जिले के सभी थाना एवं चौकी क्षेत्रों के अंतर्गत गांवों, शहरों के सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों और कॉलेजों सहित 128 से अधिक स्थानों पर जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में करीब 17,789 नागरिकों ने भाग लिया और पुलिस टीमों ने उन्हें साइबर ठगी से बचाव के महत्वपूर्ण उपायों की जानकारी दी।
नौकरी और पैसे डबल करने वाले लिंक से रहें सावधान
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने लोगों को फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन नौकरी के नाम पर ठगी, पैसे डबल करने का लालच देने वाले मैसेज और संदिग्ध लिंक से सावधान रहने की सलाह दी। नागरिकों को बताया गया कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूर करें।
पुलिस ने स्मार्टफोन की प्राइवेसी सेटिंग्स मजबूत रखने, सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा न करने तथा मॉर्फ्ड फोटो-वीडियो के जरिए होने वाले साइबर अपराधों से सतर्क रहने की अपील की।
पब्लिक Wi-Fi पर न करें बैंकिंग
पुलिस ने सार्वजनिक स्थानों जैसे बस स्टैंड, कैफे आदि में उपलब्ध अनजान या मुफ्त Wi-Fi के इस्तेमाल को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी। विशेष रूप से ऐसे नेटवर्क से जुड़कर बैंकिंग, UPI लेन-देन या पासवर्ड संबंधी कार्य नहीं करने की समझाइश दी गई।
ऐप परमिशन की समय-समय पर करें जांच
मोबाइल में नए ऐप इंस्टॉल करते समय कैमरा, माइक्रोफोन, कॉन्टैक्ट्स और स्टोरेज जैसी परमिशन को बिना पढ़े अनुमति नहीं देने की सलाह दी गई। पुलिस ने नागरिकों से मोबाइल सेटिंग्स में जाकर समय-समय पर यह जांचने को कहा कि कौन-सा ऐप किस प्रकार की अनुमति का उपयोग कर रहा है।
स्क्रीन शेयरिंग और रिमोट एक्सेस फ्रॉड से बचें
साइबर ठगी के नए तरीकों के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा कि अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के साथ मोबाइल स्क्रीन साझा करने से बैंकिंग और निजी जानकारी के दुरुपयोग का खतरा हो सकता है।
OTP, PIN और CVV किसी से साझा न करें
पुलिस ने नागरिकों को स्पष्ट रूप से समझाया कि OTP, ATM/डेबिट कार्ड नंबर, PIN, CVV, बैंक खाता विवरण और UPI PIN जैसी गोपनीय वित्तीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें। बैंक या किसी विश्वसनीय संस्था के नाम पर फोन करने वाले व्यक्ति की बातों पर तुरंत भरोसा करने से भी बचने की सलाह दी गई।
साइबर ठगी होते ही 1930 पर करें कॉल
पुलिस ने अपील की कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो घबराने के बजाय तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। साथ ही नजदीकी थाना या साइबर सेल में भी घटना की जानकारी दें।
पुलिस के अनुसार, साइबर फ्रॉड की सूचना जितनी जल्दी दी जाएगी, ठगी गई रकम को होल्ड कराने और उसे वापस दिलाने की संभावना उतनी ही बेहतर हो सकती है।

