
सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के संवेदनशील कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे के मार्गदर्शन में तथा डॉ एफ आर निराला के देखरेख में महामारी नियंत्रण के लिए एक कार्ययोजना बनाई गई महामारी ग्रीष्म कालीन एवं वर्षा ऋतु में एक आम स्वास्थ्य समस्या होती है समय रहते इस की योजना बना कर टीम तैयार रख लिए जाने से आम जनता को अच्छे स्वास्थ्य सुविधा मिल सकती है आप जानते ही है कि गर्मी के मौसम में हमे पानी की ज्यादा जरूरत पड़ती है लेकिन पानी के स्रोत कम पड़ते है वॉटर लेवल लगातार नीचे जा रहा है एवं जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी कुछ ज्यादा ही पड़ने लगी जिसके कारण मनुष्य ही नहीं बल्कि तमाम जंतु पशु पक्षी सभी प्रभावित होते है दूषित पानी पीने से या बासी भोजन करने से अनेकों प्रकार की स्वास्थ्य समस्या आ सकती है जिसमे पीलिया ,उल्टी दस्त ,पेचिश ,गैस्ट्रोएंटराइटिस ,टाइफाइड आदि जिले के तीनों विकाश खंड के ऐसे सभी गांवों की पहचान की जा रही है जहां महामारी की बीमारी हो सकती है कुछ गांव ऐसे है जहां विगत तीन वर्ष के भीतर उल्टी दस्त ,डायरिया या पेचिश की शिकायत हुई है उन सभी गांव में विशेष प्रचार प्रसार करना ,वहां जागरूकता अभियान चलाना ,नारे लेखन कराना यही नहीं बल्कि वहां के डिपो होल्डर याने मितानिन के पास समय रहते दवाइयों की भंडारण करना प्रमुख कार्य होता है जिले के बरमकेला ब्लॉक के अंतर्गत ऐसे संवेदनशील गांव जहा डायरिया हो सकता है ऐसे 3 गांव चिन्हांकित किए गए है 3 गांव बिलाईगढ़ से भी है जबकि सारंगढ़ से एक भी गांव चिन्हांकित नहीं हुए है ऐसे ही ब्लॉकवाइज पहुँचविहीन गांव की श्रेणी में बरमकेला में 2 गांव है ,बिलाईगढ़ में 9 गांव बताए जा रहे है जबकि सारंगढ़ से कोई गांव पहुंच विहीन नहीं है ऐसा बताया गया ऐसे ही जिले में कुछ गांव ऐसे भी है जहां ज्यादा बारिश होने से गांव बाढ़ प्रभावित क्षेत्र हो जाता है गांव पानी से घिर जाता है एवं जनजीवन प्रभावित होता है ऐसे गांव बरमकेला ब्लॉक से 23 गांव है ,बिलाईगढ़ ब्लॉक में 10 है जबकि सारंगढ़ ब्लॉक में बाढ़ प्रभावित गांव 17 है इस तरह से जिले में संवेदनशील गांव सब मिलकर 68 हो जाता है कार्ययोजना बनाई गई है जिसमे अभी इन गांवों में विशेष कैंप लगाकर वहां लोगो को जागरूक करेंगे उल्टी दस्त ,डायरिया ,पेचिश ,पीलिया जैसे जलजनित बीमारी से कैसे बचा जा सकता है इसके बारे में ग्रामीण जानों को बताना ,ग्राम में नारे लेखन करना ,ग्राम के पेयजल स्रोतों का आंकलन करना ,शुद्धिकरण करने के लिए जल संसाधन विभाग से समन्वय करना ,माह मई अंत तक दवा भंडारण करना ,गांव में सूचना तंत्र को मजबूत करना ,गांव की सतत मॉनिटरिंग करना आदि पहली प्रयास तो यही होना चाहिए लोग बीमार पड़े ही न लेकिन बीमारी की शिकायत होने पर इसकी तत्काल सूचना क्षेत्रीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हो जिससे वे तत्काल पीड़ित गांव की ओर अग्रसर हो सके इसके लिए प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक रैपिड रिस्पॉन्स टीम बनाई गई जो सूचना मिलते ही तत्काल पीड़ित गांव परिवार तक टीमा कार्यकर्ता पहुंच सके एवं जानकारी एकत्र करके अपने बीएमओ को सूचना दे तत्परता से प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराना होगा ,परामर्श लेने के लिए 104 भी रहती है,ट्रांसपोर्ट के लिए 108 को बुलाई जा सकती है प्रत्येक गांव के मितानिन के पास भी कुछ दवाइयों रखी जाएगी जो प्राथमिक उपचार देगी ज्यादा सीरियस होने पर वे इसका संदर्भ phc या chc में करेंगे जल संसाधन विभाग सभी पेयजल स्रोतों की शुद्धि करण करते है अगर पेयजल स्रोत कुएं है तब इसकी शुद्धिकरण साप्ताहिक रूप से मितानिन एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता करते है ये गांव की सतत निगरानी भी करते है विशेष परिस्थिति में ये ब्लॉक या जिले की कंट्रोल रूम को सूचित करते है जिला ,ब्लॉक एवं phc स्तर पर कुल 18 रैपिड रिस्पॉन्स टीम बनाई गई है अभी गर्मी में मौसम में खाद्य सुरक्षा अभिकारियों की टीम भी सक्रिय है सभी खाने पीने की चीजों पर नजर लगाए हुए है चाहे गन्ना रस भंडार हो ,आइस फैक्ट्री हो गुपचुप सेंटर हो ,कोई कोल्ड ड्रिंक हो या कोई होटल हो सभी पर बजाय बनाए हुए है इनकी नियमित जांच की जा रही है
